20 February 10th Social Science Subjective Question 2026

20 February 10th Social Science Subjective Question 2026

Bihar Board Class 10th Annual Exam 2026

इस पोस्ट के माध्यम से सामाजिक विज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न जो फाइनल परीक्षा में पूछा जाएगा वैसे प्रश्न दिया गया है इस प्रश्न को जरूर पढ़ें 

 

परीक्षा की तिथियां:

मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी।

 

परीक्षा की पालियां: परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों (Shifts) में होगी:

 

प्रथम पाली: सुबह 09:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।

 

द्वितीय पाली: दोपहर 02:00 बजे से शाम 05:15 बजे तक।

 

प्रश्नों का प्रकार: बोर्ड 50% वस्तुनिष्ठ (Objective/MCQs) और 50% विषयनिष्ठ (Subjective) प्रश्नों का पैटर्न अपनाता है।

 

अतिरिक्त समय: परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है।

 

रिपोर्टिंग समय: परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य है।

 

Subject  Social Science 
Exam Date  20.2.2026
Exam Type  Ofline 
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Subjectives Question Answer 

1. इटली, जर्मनी के एकीकरण में ऑस्ट्रिया की भूमिका क्या थी?

उत्तर- इटली तथा जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया सबसे बड़ी बाधा थी। एकीकरण के पीछे मूलतः राष्ट्रवादी भावना थी और आस्ट्रिया का चांसलर ‘मेटरनिख’ घोर प्रतिक्रियावादी था उसने इटली तथा जर्मनी में एकीकरण हेतु होने वाले सभी आन्दोलनों अथवा प्रयासों को दबाया। मेटरनिख की दमनकारी नीति के प्रतिक्रिया स्वरूप इटली तथा जर्मनी की जनता में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ती गई।

आस्ट्रिया में मेटरनिख के पतन के बाद इटली तथा जर्मनी के लोगों ने एकीकरण के मार्ग का सबसे बड़ी बाधा समाप्त हुआ देख पुनः भारी उत्साह के साथ एकीकरण का प्रयास किया और अंततः सफलता पायी।

 

2. सर्वहारा वर्ग किसे कहते हैं?

उत्तर – समाज का वह लाचार वर्ग जिसमें गरीब किसान, कृषक मजदूर, सामान्य मजदूर, श्रमिक एवं आम गरीब लोग शामिल हो उसे सर्वहारा वर्ग कहते हैं। इस वर्ग के लोगों के पास बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं होतीं। घनी वर्ग इस वर्ग को उपेक्षित नजरों से देखते हैं।

 

3. असहयोग आन्दोलन प्रथम जनांदोलन था। कैसे?

उत्तर – 1920 ई० में गाँधीजी के नेतृत्व में चलाया गया असहयोग ‘आन्दोलन इस मायने में प्रथम जन-आन्दोलन था कि इससे पूर्व के सभी आन्दोलन आर्थिक या सामाजिक आधार पर किसी वर्ग-विशेष के द्वारा अपने हितों की रक्षा अथवा पूर्ति के लिए चलाये गये थे जबकि असहयोग आन्दोलन के कार्य ऐसे थे कि हर तरह के लोग इसमें अपना योगदान कर सकें। जैसे— सरकारी उपाधियों एवं अवैतनिक पदों का त्याग, सरकारी और अर्द्धसरकारी उत्सवों का बहिष्कार, सरकारी स्कूलों एवं कॉलेजों का बहिष्कार, सरकारी न्यायालयों का बहिष्कार, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार आदि। जनता ने अपने-अपने स्तर के अनुरूप इन कार्यक्रमों में योगदान दिया और असहयोग आन्दोलन को जन-आन्दोलन का रूप प्रदान किया।

 

 

 

 

4.औद्योगीकरण ने मजदूरों की आजीविका को किस तरह प्रभावित

किया?अथवा, , उद्योग के विकास ने किस प्रकार मजदूरों को प्रभावित किया? उन पर पड़ने वाले प्रभावों पर आपकी क्या राय है?

उत्तर—औद्योगीकरण के फलस्वरूप बड़े-बड़े कारखाने स्थापित हुए जिसके समक्ष छोटे उद्योग टिक नहीं सके। सामाजिक भेद-भाव की शुरूआत हो गई। औद्योगीकरण ने मजदूरों की आजीविका को इस तरह नष्ट-भ्रष्ट कर दिया कि उनके पास दैनिक उपयोग की वस्तुओं को खरीदने के लिए धन नहीं रहा। अब मजदूर और बेरोजगार कारीगरों ने झुंड बनाकर घूमना शुरू किया और मशीनों को तोड़ने में लग गये। अपनी स्थिति में सुधार की अपेक्षा उन्होंने आन्दोलनों को शुरू किया। इससे वर्ग संघर्ष की शुरूआत हुई।

 

5.स्लम पद्धति की शुरुआत कैसे हुई? अथवा, स्लम से आप क्या समझते हैं? इसकी शुरूआत क्यों और कैसे हुई?

उत्तर—छोटे, गंदे और अस्वास्थ्यकर स्थानों में जहाँ फैक्ट्री मजदूर निवास करते थे वैसे आवासीय स्थलों को ‘स्लम’ कहा जाता है। औद्योगीकरण के फलस्वरूप बड़े-बड़े कारखाने स्थापित हुए जिसमें काम करने के लिए बड़ी संख्या में गाँवों से मजदूर पहुँचाने लगे। वहाँ रहने के कोई व्यवस्था नहीं थी। मजदूर कारखाने के निकट रहें, इसलिए कारखानों के मालिकों ने उनके लिए छोटे-छोटे तंग मकान बनवाए। जिसमें सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। इन मकानों में हवा, पानी तथा रोशनी तथा साफ-सफाई की व्यवस्था भी नहीं थी।

6. भूमंडलीकरण के भारत पर प्रभावों को स्पष्ट करें।  

 उत्तर- भूमंडलीकरण का प्रभाव भारत पर व्यापक रूप से पड़ा। इसके फलस्वरूप भारत में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। भारत में अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का आगमन हुआ जो विभिन्न तरह के उपभोक्ता सामग्रियों का उत्पादन करती हैं अथवा सेवा क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। भूमण्डलीकरण के फलस्वरूप शिक्षा एवं स्वास्थ्य के बेहतर विकल्प उपलब्ध हुए हैं। हम इसके उत्पादों का उपभोग कर रहे हैं। भूमंडलीकरण के कारण भारत में भी लोगों के जीवन स्तर में काफी सुधार आया है। उनका जीवन सुविधापूर्ण हुआ है।

 

 

7. विश्व बाजार किसे कहते हैं? 

उत्तर- विश्व बाजार उन स्थलों के बाजारों को कहते हैं जो विश्व के अनेक देशों की वस्तुएँ आमलोगों के खरीदने के लिए उपलब्ध कराती हों जैसे—भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई ।

 

8. आर्थिक संकट से आप क्या समझते हैं

उत्तर—अर्थतन्त्र में आनेवाली वैसी स्थिति जब उसके तीनों आधार कृषि, उद्योग तथा व्यापार का विकास अवरूद्ध हो जाए, जिससे लाखों लोग बेरोजगार हो जाएँ, बैंकों और कम्पनियों का दिवाला निकल जाए तथा वस्तु और मुद्रा दोनों की बाजार में कोई कीमत न रह जाए, आर्थिक संकट कहलाती है।

 

9. पाण्डुलिपि क्या है? इसकी क्या उपयोगिता है?

उत्तर—हस्तलिखित पुस्तक को पाण्डुलिपि कहते हैं। छापाखाना के विकास से पहले हस्तलिखित पांडुलिपियों को तैयार करने की पुरानी तथा समृद्ध परम्परा थी। पाण्डुलिपि काफी नाजुक, पुरानी, महँगी तथा दुर्लभ होती है। ये आम जनता के पहुँच के बाहर थीं। छापाखाना के विकास के पहले पाण्डुलिपि ही पुस्तक का कार्य करती थी। पाण्डुलिपि हमारे पूर्वजों के दुर्लभ ज्ञान का अक्षुण्ण भंडार थीं। इनका अध्ययन करके आसानी से ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

 

10.रूसी क्रांति के किन्हीं दो कारणों का वर्णन करें।

उत्तर- रूसी क्रान्ति के दो महत्वपूर्ण कारण निम्नलिखित थे— (1) जार की निरंकुशता एवं अयोग्य शासन – (यद्यपि 19वीं सदी के मध्य

में राजतंत्र की शक्ति सीमित की जा चुकी थी। रूसी राजतंत्र अपना विशेषाधिकार छोड़ने को तैयार नहीं था । जार निकोलस द्वितीय राजा के दैवी अधिकारों में विश्वास रखता था। जार की अफसरशाही अस्थिर और नेतृत्व अकुशल थी। गलत सलाहकारों के कारण जार की स्वेच्छाचारिता बढ़ती गई और जनता की स्थिति बद से बदतर होती गई।

 

(2) कृषक के रूप में मजदूरों की दयनीय स्थिति-रूस की बहुसंख्यक जनता कृषक थी जो अपने छोटे-छोटे खेत पर पुराने ढंग से खेती करती थी। दयनीय आर्थिक स्थिति में भी वे करों के बोझ से दबे हुए थे। मजदूरों को कम मजदूरी में अधिक काम करना होता था। अपनी माँगों के समर्थन में वे हड़ताल भी नहीं कर सकते थे। उन्हें कोई राजनैतिक अधिकार प्राप्त नहीं था । इस प्रकार रूसी जनता की बदहाली ही क्रान्ति का मुख्य कारण थी।

 

 11. गुटेनबर्ग ने मुद्रणयंत्र का विकास कैसे किया?

उत्तर-गुटेनबर्ग ने अपने ज्ञान और अनुभव से टुकड़ों में बिखरी मुद्रण कला को एकत्रित और संघटित कर टाईपों के लिए पंच, मेट्रिक्स, मोडल आदि बनाने पर योजनाबद्ध ढंग से काम शुरू किया। मुद्रा बनाने हेतु उसने सीसा, टिन और बिस्मिथ का उचित अनुपात में मिश्रित कर एक मिश्रधातु ढूँढ़ निकाला।

 

12. संघीय शासन की दो विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर- (i) संघीय शासन व्यवस्था के अन्तर्गत दो स्तर की सरकारें होती हैं— केन्द्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर। (ii) अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं।

13. लैंगिक असमानता क्या है?

उत्तर—लिंग के आधार पर समाज में महिलाओं व पुरुषों में जो असमानता पायी जाती है उसे लैंगिक असमानता कहते हैं। यह असमानता सामाजिक आर्थिक राजनीतिक व अन्य क्षेत्रों में पाई जाती है।

14. ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग कौन-कौन हैं?

उत्तर— ग्राम पंचायत के प्रमुख चार अंग हैं। इनके नाम हैं- (i) ग्राम सभा

(ii) मुखिया (iii) ग्राम रक्षा दल एवं (iv) ग्राम कचहरी ।

15. संघ राज्य का अर्थ बताएँ ।

उत्तर—जब सत्ता का विभाजन केन्द्रीय, राज्य या क्षेत्रीय स्तर एवं स्थानीय सरकारों के बीच वितरित कर दिया जाता है तो वह संघीय राज्य कहलाता है किन्तु सर्वोच्च सत्ता केन्द्र के पास होती है।

16. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में क्या महत्त्व रखती है?

उत्तर- लोकतंत्र शासन-प्रणाली में जनता का, जनता के लिए तथा जनता के द्वारा शासन होता है। जिस शासन व्यवस्था में राजनैतिक साझेदारी हो, वह अत्यन्त ही सशक्त प्रणाली है। यह हिस्सेदारी की व्यवस्था जिस शासन व्यवस्था में की जाती है लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था कहलाती है। गैर लोकतांत्रिक सरकारें (जैसे एक दलीय शासन प्रणाली, राजशाही या तानाशाही जैसी , स्थितियाँ) सभी को सत्ता में साझेदारी, सभी नागरिकों के लिए सत्ता की व्यवस्था में विश्वास नहीं रखती। ऐसी शासन प्रणाली प्रायः आन्तरिक सामाजिक समूहों में व्याप्त मतभेदों, विभिन्नताओं एवं अन्तरों की या तो अनदेखी करती हैं या इन्हें कुचल कर रख देती हैं। लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था ही सामाजिक विभाजनों

17. ‘चिपको आंदोलन’ के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

 उत्तर – उत्तराखण्ड के दो-तीन गाँवों से प्रारम्भ हुए इस आन्दोलन की शुरूआत ‘अंगू’ के पेड़ काटने के मुद्दे पर हुआ। ग्रामीणों को खेती भूमि में विकास के लिए अंगू वृक्ष काटने की अनुमति को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया। वहीं सरकार ने खेल का सामान बनाने वाली कम्पनी को अंगू वृक्षों को काटने का ठेका दे दिया। इसी मुद्दे ने ‘चिपको आन्दोलन’ को जन्म दिया। इस आन्दोलन ने आर्थिक शोषण से जुड़े अन्य मुद्दों को भी अपने उद्देश्यों में शामिल कर लिया । आन्दोलन का उद्देश्य था जल, जंगल और जमीन पर एकमात्र नियंत्रण स्थानीय लोगों का हो। स्थानीय भूमिहीन वनकर्मियों ने आर्थिक मुद्दा उठाया एवं न्यूनतम मजदूरी की गारन्टी माँगी। बाहरी ठेकेदारों द्वारा स्थानीय निवासियों को दिए जाने वाले शराब के कारण शराबी बन रहे लोगों की शराबखोरी पर महिलाओं ने आवाज उठाई। परिणाम स्वरूप आन्दोलन के कारण अगले 15 वर्ष तक वनों की कटाई पर सरकार ने रोक लगा दी 

18. दल-बदल कानून क्या है?

उत्तर— भारत एक बहुदलीय लोकतांत्रिक राष्ट्र है। निर्वाचित प्रतिनिधि अपने हित या अन्य किसी कारण से अपने दल को छोड़कर अन्य दल में मिल जाता है, तो यह क्रिया उस निर्वाचित सदस्य के संदर्भ में दल-बदल कहलाएगा। दल-बदल शक्ति संतुलन को बिगाड़ता है, सरकार को अस्थायी एवं भयभीत बनाए रखता है।

1985 ई० में राजीव गाँधी के नेतृत्व वाली सरकार ने दल-बदल विरोधी अधिनियम संसद में लाया। पारित अधिनियम दल विरोधी कानून बना। यदि किसी पार्टी से निर्वाचित सदस्यों का एक-तिहाई भाग अलग होता है तो यह दल-बदल नहीं कहलाएगा। एक नये दल का गठन माना जाएगा। यदि दल-बदल की घटना में एक-तिहाई से कम निर्वाचित सदस्य हैं तो यह दल-बदल माना जाएगा। दल बदलने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता विधायिका से समाप्त कर दी जाती है।

 

 

19. राजनीतिक दल की परिभाषा दें।

उत्तर- राजनैतिक दल लोकतंत्र के व्यावहारिक पक्ष को अमलीजामा पहनाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनैतिक दल सामान्यतः व्यक्तियों का एक ऐसा समूह है जिसका सामान्य उद्देश्य सत्ता की प्राप्ति है अर्थात् इसका उद्देश्य होता है राजनैतिक कार्यकलाप को करना और कराना। राजनैतिक क्रियाकलापों में दल के सदस्य मतदान करते या कराते हैं। चुनाव लड़ते या लड़ाते हैं, नीतियाँ एवं कार्यक्रम का निर्धारण करते या कराते हैं। यदि विचारों में मूल रूप से भिन्नता आ जाती है तो व्यक्ति को दल छोड़ना पड़ता है। सत्ता प्राप्ति तथा सत्ता को प्रभावित करने हेतु राजनैतिक दल अपनी-अपनी नीतियाँ एवं कार्यक्रम तैयार करते हैं।

20. आर्थिक नियोजन क्या है? इसके मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर—आर्थिक नियोजन का अर्थ राष्ट्र की प्राथमिकताओं के अनुसार देश के संसाधनों का विभिन्न विकासात्मक क्रियाओं में प्रयोग करना है। इस प्रकार अर्थव्यवस्था के लिए उपलब्ध संसाधनों का ऐसा नियोजन, समन्वय एवं उपयोग है जिनसे हम समयबद्ध कार्यक्रम के अन्तर्गत पूर्व निर्धारित सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त कर डालते हैं।

उद्देश्य — (i) भारत में व्याप्त गरीबी, निर्धनता को समाप्त करना। (ii) शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार लाना। (iii) प्रति व्यक्ति आर्थिक आय में बढ़ोतरी करना । (iv) देशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना (v) भूमि की उर्वरा शक्ति का शत प्रतिशत उपयोग कर भारत की समृद्धि में अप्रत्याशित बढ़ोतरी करना।

 

 

 

21. अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं? इनके दो कार्य कौन-कौन से हैं?

उत्तर – अर्थव्यवस्था से तात्पर्य वैसी क्रियाओं का सम्पादन, जिसमें आर्थिक उत्पादन निहित होता है। आर्थर लेविस ने अर्थव्यवस्था के सम्बंध में कहा कि ‘अर्थव्यवस्था का सम्बन्ध किसी राष्ट्र के सम्पूर्ण व्यवहार से होता है जिसके आधार पर मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए वह अपने संसाधनों का प्रयोग करता है। ब्राउन ने कहा कि ‘अर्थव्यवस्था आजीविका अर्जन की एक प्रणाली है।’ कहना अनुचित नहीं होगा कि अर्थव्यवस्था आर्थिक क्रियाओं का ऐसा संगठन है जिसके अन्तर्गत लोग कार्य का मौका पाकर अपनी आजीविका का सम्पादन करते हैं। अर्थव्यवस्था के दो कार्य इस प्रकार हैं— (i) लोगों की आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करती है। (ii) लोगों को रोजगार का अवसर प्रदान करता है  

 

22. ए० टी० एम० क्या है?

उत्तर- ए० टी० एम० कार्ड को ए० टी० एम० सह डेबिट कार्ड भी कहा जाता है। प्लास्टिक मुद्रा के रूप में प्रचलित आज इस मुद्रा का प्रयोग विनिमय क्रिया को सम्पादित करने किया जा रहा है। ए० टी० एम० (Automatic Teller Machine) 24 घण्टे रुपये निकालने तथा जमा करने की सुविधा प्रदान करता है। ए० टी० एम० के लिए एक गुप्त पीन (Code) होता है जिसे बगैर जाने ए० टी० एम० का संचालन सम्भव नहीं ।

और प्रश्न next पोस्ट में मिलेगा by RK EXPERT CLASSES 

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