17 February Class 10th Hindi Question Paper 2026
| Subject | Hindi |
| Exam Date | 17.2.2026 |
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17 February 10th Subjectives question Answer 2026
1. जातिप्रथा भारत के बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है?
[2017AII,2021A1,2022AII]
उत्तर – भीमराव अंबेदकर ने ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ में लिखा है कि जाति प्रथा पेशे का दोषपूर्ण पूर्व निर्धारित ही नहीं करती बल्कि मनुष्य को जीवनभर के लिए एक पेशों में बाँध भी देती है। भले ही पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त होने के कारण वह भूखों मर जाए। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपना पेशा बदलने की स्वतंत्रता न हो तो भूखे मरने के अलावा क्या रह जाता है। इस प्रकार पेशा परिवर्तन की अनुमति न देकर जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।
2.भारतीय समाज में जाति श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती?
[2023AII]
उत्तर- भीमराव अंबेदकर ने ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ शीर्षक निबंध में भारत में व्याप्त जाति प्रथा की निंदा की है। जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप नहीं कही जा सकती है। यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। यह प्रथा पेशे की स्वतंत्रता का गला घोंट देती है। यह एक दूषित प्रथा हो गयी है। स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व का यह प्रथा हनन करती है।
3.खोखा किन मामलों में अपवाद था ?
उत्तरः-सेन साहब का बेटा काशु (खोखा) घर में बनाए गए नियम के मामलों में अपवाद था। वह हमेशा अपने मन के अनुसार ही कार्य करता था पर लड़कियों को ऐसी आजादी नहीं थी।
4.सीता का चरित्र-चित्रण करें।
[2011C, 2013C]
उत्तर- ‘धरती कब तक घूमेगी’ (साँवर दइया) की सीता एक विधवा नारी थी। वह अत्यन्त सहनशील थी। बहुएँ हर समय विषपूर्ण बातें उससे बोलती थी। वह सबकुछ सह लेती थी। वह एकांकी पड़ती गयी। बेटों ने एक-एक महीने की पाली पर रखा तो उसे कोई आपत्ति नहीं हुई। जब 50-50 रुपये प्रति माह देने पर तीनों बेटे राजी हुए तो उसका स्वाभिमान जाग उठा। वह अपना बोरिया-बिस्तर लेकर घर से निकल पड़ी। सीता एक आदर्श माँ थी।
5. विष के दाँत कहानी का नायक कौन है? तर्क पूर्ण उत्तर दें।
[2014A1,2017A1,2022AII]
उत्तर-आचार्य नलिन विलोचन शर्मा की कहानी ‘विष के दाँत’ का नायक मदन है। काशू इस कहानी का मुख्य पात्र है जो कहानी के आरंभ से अंत तक छाया रहता है। वह जीवन के नियमों का अपवाद था। उसे अपने पिता की अमीरी का घमंड था। मदन एक गरीब किन्तु निर्भीक और जीवट प्रवृत्ति का लड़का है। वह आत्म सम्मान प्रिय बालक है, इसी कारण वह ड्राइवर की बातों का प्रतिरोध करता है। मदन ही काशू के घमंड रूपी विष के दाँत को तोड़ता है
6.बहादुर अपने घर से क्यों भाग गया था
उत्तर:-एक बार बहादुर ने अपनी माँ की प्यारी भैंस को बहुत मारा। माँ ने भैंस की मार का काल्पनिक अनुमान करके एक डंडे से उसकी दुगुनी पिटाई की। लड़के का मन माँ से फट गया और वह चुपके से 2 रुपया लिया और घर से भाग गया।
7. लेखक अमरकांत को क्यों लगता है कि नौकर रखना बहुत जरूरी हो गया है?अथवा, किन कारणों से बहादुर ने एक दिन लेखक का घर छोड़ दिया? ‘बहादुर’ शीर्षक कहानी के अनुसार लिखें।
उत्तर-एक दिन लेखक के घर आए रिश्तेदार ने बहादुर पर रुपये चोरी का आरोप लगा देता है। गलत आरोप के कारण बहादुर इनकार कर दिया फिर भी उसे डराया-धमकाया और पीटा जाता है। इस घटना के बाद बहादुर काफी डाँट-मार खाने लगा। घर के सभी लोग कुत्ते की तरह दुरदुराया करते। किशोर तो जैसे उसकी जान के पीछे पड़ गया था। ईमानदार बहादुर को इस घटना पर अत्यन्त क्षोभ होता है और वह लेखक का घर छोड़कर चला जाता है।
8. बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज अपनी माँ को क्यों मानते थे?
[2018A1]
उत्तर-पिता जी के निधन के बाद बिरजू महाराज को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ा हाथ उनकी माँ का था। जब भी अम्मा नाच देखती थी तो बिरजू महाराज पूछते थे कि कही गलत तो नहीं कर रहा हूँ? बाबू जी वाला ढंग है या नहीं। कहीं गड़बड़ी तो नहीं हो रही। तब अम्मा बताती थी, तुम अपने बाबू जी की तस्वीर हो। इस प्रकार अम्मा इनका उत्साहवर्द्धन करते रहती थी। इसलिए बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज अपनी माँ को मानते थे
9. मछली और दीदी में क्या समानता दिखलाई पड़ी? स्पष्ट करें।
[2013A]
उत्तर-आदमी के चपेट में आने पर मछली कटने के लिए मजबूर थी। पानी नहीं रहने के कारण गमछे में लिपटी मछली लहरा रही थी। दीदी कमरे में करवट लिए पहनी हुई साड़ी को सिर से ओढ़े सिसक-सिसक कर रो रही थी। हिचकी लेते हुए दीदी का पूरा शरीर सिहर रहा था।
10. शिक्षा का ध्येय गाँधीजी क्या मानते थे और क्यों? [2012A, 2022AII]
उत्तर-शिक्षा का ध्येय गाँधीजी चरित्र-निर्माण को मानते हैं। यह साक्षरता से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, किताबी ज्ञान तो उस बड़े उद्देश्य का एक साधन मात्र है।
गाँधीजी का मानना है कि अगर हम व्यक्ति चरित्र निर्माण करने में सफल हो जाएँगे तो समाज अपना काम आप संभाल लेगा। इस प्रकार जिन व्यक्तियों का विकास हो जाएगा, उनके हाथों में समाज के संगठन का काम सौंपा जा सकता है।
11. गाँधीजी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं? ‘शिक्षा और संस्कृति’ पाठ के अनुसार लिखें।
(2024A1)
उत्तर- अहिंसक प्रतिरोध को गाँधीजी सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा कहते हैं। उनके अनुस यह शिक्षा बच्चों को मिलनेवाली साधारण अक्षर-ज्ञान की शिक्षा के बाद नहीं पहल होनी चाहिए।
12. कवि किसके बिना जगत् में जन्म व्यर्थ मानता है?
[2016A1,2022AI]
उत्तर-निर्गुण ब्रह्म उपासक गुरु नानक ‘राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा’ शीर्षक कविता में राम नाम की महिमा का बखान करते हुए कहते हैं कि ईश्वर की महिमा अपरमपार है। नाम-कीर्तन से बढ़कर कोई धर्म साधना नहीं है। इसलिए राम नाम के बिना जगत् में मनुष्य जन्म व्यर्थ है। राम नाम लेने से ही ईश्वर एवं ईश्वरत्व की प्राप्ति होती है।
13. कृष्ण को चोर क्यों कहा गया है? कवि का अभिप्राय स्पष्ट करें।
[2015A11,2022AI]
उत्तर-कवि रसखान कृष्ण और राधा के सुंदर और मोहक छवि का बखान करते हुए कहते हैं कि उनके मनमोहक छवि को देखकर मन पूर्णतः मनमुग्ध हो गया है। यह लगता है कि यह शरीर मन और चित्त रहित हो गया है। अब उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता केवल कृष्ण ही उनके स्मृति पटल पर अंकित रहते हैं। इसलिए चित को हरने वाले कृष्ण को चोर कहा गया है।
14.कवि अपने आँसुओं को कहाँ पहुँचाना चाहता है और क्यों
उत्तरः- कवि अपनी प्रेमिका सुजान के लिए विरह-वेदना को प्रकट करते हुए बादल से अपने प्रेम रूपी आँसुओं को पहुंचाने के लिए कहता है। वह अपने आँसुओं को सुजान के आँगन में पहुँचाना चाहता। है, क्योंकि वह उसकी याद में पीड़ित है और अपनी व्यथा के आँसुओं से प्रेमिका को भिगो देना चाहता है।
15. छायाएँ दिशाहीन सब ओर क्यों पड़ती हैं? स्पष्ट करें।
[2012C, 2014AII,2021BM]
उत्तर-परमाणु बम के विस्फोट से जो अग्नि पैदा होती है उसका प्रकाश अनंत होता है। धरती के मनुष्य जल जाते हैं। कोई नहीं बचता है। मनुष्य की कोई छाया बनती नहीं या बनती है तो वह दिशाहीन होती है। मनुष्य भाप बन जाता है। हाँ, प्राकृतिक सूर्य के उगने से छायाएँ बनती है। उनकी दिशा और लम्बाई होती है।
16. कवि जीवनानंद दास किस तरह के बंगाल में एक दिन लौटकर आने की बात करते हैं?
[2024AII]
उत्तर-कवि जीवनानंद दास को अपनी मातृभूमि से असीम प्रेम है। उनकी उत्कट, इच्छा मातृभूमि पर पुनर्जन्म की है। वे कवि बंगाल के उस अनुपम, सुशोभित एवं रमरणीय धरती पर एक दिन लौटकर आने की बात करते हैं जहाँ धान के खेत हो, जहाँ बहती नदी का किनारा हो और जहाँ भोर की सुनहली किरणे हों।
17.कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार क्यों लगता था ?
उत्तरः- कवि एक वृक्ष के बहाने प्राचीन सभ्यता, संस्कति एवं पर्यावरण की रक्षा की चर्चा की है। वृक्ष मनुष्यता, पर्यावरण एवं सभ्यता की प्रहरी है। यह प्राचीनकाल से मानव के लिए वरदानस्वरूप है, इसका पोषक है, रक्षक है। इन्हीं बातों का चिंतन करते हुए कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार लगता था
18. मैक्समूलर की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों?
उत्तर—मैक्समूलर की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई जैसे शहरों में नहीं, भारत के गाँवों में हो सकते हैं, क्योंकि इसकी सर्वाधिक आबादी गाँवों में बसती है। वहीं हार्दिक संपन्नता और आर्थिक विपन्नता है। धर्म और इतिहास के अवशेष वहीं सुरक्षित हैं।
19. धर्म की दृष्टि से भारत का क्या महत्व है? ‘भारत से हम क्या सीखें’ पाठ के आधार पर बतायें।
उत्तर-धर्म की दृष्टि से भारत अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसलिए कि धर्म के उद्भव और उसके नष्ट होनेवाले रूप का यहाँ प्रत्यक्ष ज्ञान यहाँ होता है। यह वैदिक धर्म, बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म की जन्मभूमि है तो इस्लाम और ईसाई धर्म की शरणस्थली भी है। यहाँ विभिन्न धर्मावलम्बी सदियों से हिलमिल कर रहते हैं। मत-मतान्तर यहाँ प्रकट और विकसित होते हैं।
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20. काशू और मदन के बीच झगड़े का क्या कारण था?
उत्तर—काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण काशू की लट्टू खेलने की ललक और मदन द्वारा उसे खेलाने से इनकार करना था। लेखक इसके द्वारा बच्चों की ईर्ष्या और इनकार दिखाना चाहता है।
21. मनुष्य बार-बार नाखूनों को क्यों काटता है? ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ शीर्षक पाठ के अनुसार लिखें।
[2024AII]
उत्तर-नाखून, मनुष्य के पाशवी वृत्ति के जीवंत प्रतीक है। मनुष्य अपनी पशुता को जितनी बार काट दें वह मरना नहीं जानती। इसके नाखून आज भी बढ़ रहे हैं। यह मनुष्य के पशुत्व का प्रमाण है। अपने नाखून को बार-बार काटने की प्रवृत्ति उसके मनुष्यता की निशानी है। मनुष्य के भीतर बर्वर युग का कोई अवशेष रह न जाए इसलिए मनुष्य अपने नाखून को बार-बार काटता है।
22. देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं?
[2016A1,2021BM, 2022AII]
उत्तर-देवनागरी लिपि में हिंदी, हिंदी की विविध बोलियाँ, नेपाली, नेवारी एवं मराठी भाषाएँ लिखी जाती हैं।
23. परम्परा ज्ञान किनके लिए आवश्यक है और क्यों?
उत्तर- जो लोग साहित्य में युग परिवर्तन चाहते हैं, जो लकीर के फकीर नहीं हैं और जो रूढ़ियाँ तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य की रचना करना चाहते हैं, उनके लिए साहित्य की परम्परा का ज्ञान जरूरी है। ऐसा इसलिए कि साहित्य की परम्परा के ज्ञान से ही प्रगतिवादी दृष्टिकोण विकसित होता है और परिवर्तन-मूलक साहित्य का जन्म होता है।
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24. डुमराँव की महत्ता किस कारण से है?
उत्तर- डुमराँव की महत्ता दो कारणों से है। पहली तो यह कि इसके आस-पास की नदियों के कछारों में ‘रीड’-‘नरकट’ नामक एक प्रकार की – घास पाई जाती है जिसका प्रयोग शहनाई बजाने में किया जाता है। दूसरा कारण यह है कि शहनाई के शाहंशाह बिस्मिल्ला खाँ का यह पैतृक निवास है। इनके परदादा उस्ताद सलार हुसैन यहीं के थे और इनके खानदान के लोग शहनाई बजाते थे।
25. परहित के लिए देह कौन धारण करता है? स्पष्ट कीजिए।
[2024AI]
उत्तर-परहित के लिए देह बादल धारण करता है। बादल जल की वर्षा करके सभी प्राणियों में जीवन संचार करता है, जिससे सुख-चैन मिलता है। बादल की वर्षा उसके विरह के आँसू के प्रतीक स्वरूप है। उसके विरह के आँसू अमृत की वर्षा करते हैं। जिसकी एक-एक बूँद दूसरे को समर्पित कर देता है अपने लिए कुछ भी नहीं रखता। वह सब कुछ लुटा देता है, बदले में कुछ नहीं लेता। वह निःस्वार्थ है, उसका देह परहित के लिए है।
26. कवि ने ‘डफाली’ किसे कहा है और क्यों? [2011A, SENTUP2020]
उत्तर-‘स्वदेशी’ शीर्षक कविता के रचयिता बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ (1885-1922 ई०) ने अंगरेज प्रशंसक एवं अंगरेजियत पसन्द करने वाले लोगों को डफ बजाने वाला या डफाली कहा है। ये लोग अंगरेजों की खुशामद करते थे, उनकी झूठी प्रशंसा करते थे। ये लोग दास-वृत्ति और नौकर वृत्ति अपना ली थी। चारों वर्ण के लोग इसमें सम्मिलित थे। अपने कपड़े ये ठीक से नहीं पहन पाते थे। वे देश का ख्याल कैसे करेंगे?
27. ‘भारतमाता’ कविता में कवि भारतवासियों का कैसा चित्र खींचता
[2013A,2022AII]
उत्तर- ‘भारतमाता’ कविता में कवि ने दर्शाया है कि परतंत्र भारत की स्थिति दयनीय हो गई है। भारतमाता गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई है। यहाँ, की तीस करोड़ जनता शोषित-पीड़ित, भूखे पेट, नग्न बदन है। भारत का सिर झुका हुआ है। जनता असभ्य, अशिक्षित, निर्धन एवं वृक्षों के नीचे निवास कर रही है। इस कविता में कवि गुलामी की त्रासदी और वेदना में पड़ी भारतमाता का चित्र खींचा है
28. भारतमाता अपने ही घर में प्रवासिनी क्यों बनी हुई हैं?
[2019AI,SENTUP EX-2020]
उत्तर- भारतमाता गुलामी के कारण अपने घर में ही प्रवासिनी-प्रदेश में रहनेवाली बनी हुई है। यह कविता गुलाम भारतवर्ष में लिखी गयी थी।
भारतमाता दीनता में जड़ीभूत हैं। उनकी पलकें नहीं गिरती हैं। उनका चित्त झुका हुआ है। मन गिरा हुआ है। मन अवसादग्रस्त है। अधरों पर, ओंठों पर दीर्घकाल से नीरव रोदन-रूलाई थिरक रही है। युगों-युगों के अंधकार से मन विषाक्त हो गया है। वह अपने घर में ही घर-विहीन प्रवासिनी बनी हुई है । भारतमाता के कष्टों को बयान करनेवाली ये पंक्तियाँ भारत की गरीबी का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती है।
29. भारतमाता का ह्रास भी राहुग्रसित क्यों दिखाई पड़ता है?
[2019AI,2020BM]
उत्तर-जिस प्रकार पूर्ण चन्द्रमा की रात ज्योत्सना को राहु ग्रस कर निस्तेज कर देता है, ठीक उसी प्रकार भारतमाता की हँसी बंद है। वह दुःख, अभाव, गरीबी से ग्रसित है। उसकी आजादी को विदेशियों ने छीनकर गुलाम बना डाला है। ऐसी पराजय, संताप, दुःख और दैन्य के कारण ही भारतमाता की मुस्कुराहट राहुग्रसित दिखायी पड़ती है।
30. कवि प्रेमघन को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती?
उत्तर— कवि प्रेमघन जब भारतभूमि पर दृष्टिपात करते हैं तो पाते हैं कि चारों ओर लोग अंग्रेजी वेश-भूषा में हैं, रहन-सहन, रीति-रिवाज भी लोगों का विदेशियों जैसा हो गया है, घर-द्वार भी लोग विदेशी-शैली के बनाने लगे हैं। लोगों को हिन्दी बोलने में शर्म और अंग्रेजी में संभाषण करने पर गर्व का बोध होता है। लोग हिन्दुस्तानी नाम से घृणा करते हैं। इस प्रकार, कवि को भारत में कहीं भारतीयता दिखाई नहीं पड़ती।
31. “देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में” पंक्ति के माध्यम से कवि किस देवता की बात करता है और क्यों?
उत्तर – कवि दिनकर के अनुसार जनतंत्र में प्रजा ही, जनता ही, सब-कुछ होती है। वह राजा होती है। उसी के नाम पर, उसी के हित के लिए, उसके द्वारा अधिकार – प्रदत्त लोग शासन करते हैं। इस प्रकार, प्रजा ही राजा है, जनतंत्र का देवता है। और चूँकि प्रजा किसान और मजदूर है, अतः कवि कहता है कि जनतंत्र के देवता राजप्रासादों, मंदिरों में नहीं मिलेंगे। ये मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में, सड़कों पर ।
32. हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है?
[2011C, 2012A, 2020AI]
उत्तर- सच्चिदानंद हीरानन्द वात्सयायन ‘अज्ञेय’ रचित कविता ‘हिरोशिमा’ आधुनिक सभ्यता की दुर्दान्त मानवीय विभीषिका का चित्रण करती है। यह कविता आनेवाले युग के लिए एक चेतावनी भी है। हिरोशिमा में मनुष्य का रचा हुआ सूरज परमाणु बम मनुष्य को ही सोख गया।
33. बेटे के आँसू कब आते हैं और क्यों? या सृष्टि-विकास की कथा क्या है?
अथवा, कवियित्री के अनुसार बेटे को आँसू कब आता है और क्यों?
उत्तर—बेटा अक्षर ज्ञान की सीढ़ियाँ चढ़ता हुआ, धीरे-धीरे जब ‘ङ’ लिखना चाहता है तो परेशानी में पड़ जाता है। ‘ड’ की टेढ़ी-मेढ़ी बनावट उससे सधती नहीं। ‘ड’ को माँ और बिन्दु (.) को उसकी गोद में बैठा मान लेने पर भी वह लिखने में सफल नहीं होता। वह अनवरत कोशिश करता है किन्तु कामयाब नहीं होता और उसकी आँखों से आँसू निकल आते हैं। किन्तु उसकी असफलता के आँसू उसमें हताशा नहीं, उत्साह पैदा करते हैं और यह उत्साह ही सृष्टि-विकास की कथा है।
34. ‘हमारी नींद’ कविता में कवि किन का और क्यों जिक्र करता है?
उत्तर—कवि ने अपनी काव्य-रचना ‘हमारी नींद’ में अनेक अत्याचारियों का उल्लेख किया है। उसकी दृष्टि में वे भी अत्याचारी हैं जो जीवन की, यों ही, अनेक समस्याओं को जन्म देते हैं। इनके बाद कवि उन लोगों को अत्याचारी कहता है, जो तरह-तरह के उन्माद में दंगे करते-कराते हैं। इतना ही नहीं, अपने विरोधी के घर-द्वार को आग के हवाले करते हैं। फिर कवि कहता है कि सत्ता या साम्राज्य विस्तार के लिए नाना प्रकार के बमों का इस्तेमाल कर लोगों का सर्वनाश करनेवाले भी अत्याचारी ही हैं। इनके अलावा कवि उन लोगों को भी अत्याचारियों में शुमार करता है जो अंध-विश्वासों को जन्म देते और गरीबों की धार्मिक भावनाओं का शोषण करते हैं।
35. पाप्पाति कौन थी और वह शहर क्यों लाई गई थी?
उत्तर—पाप्पाति तमिलनाडु के एक गाँव की महिला वल्लि अम्माल की बेटी थी। उसे बुखार आ गया। जब वल्लि अम्माल उसे लेकर गाँव के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में दिखाने गई तो वहाँ के डॉक्टर ने अगले दिन सुबह ही जाकर नगर के बड़े अस्पताल में दिखाने को कहा। बस, पाप्पाति को लेकर सुबह की बस से नगर के बड़े अस्पताल में दिखाने पहुँच गई।
36. मंगम्मा की बहू ने विवाद निपटाने में पहल क्यों की? अथवा, बहू ने सास को मनाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया?
उत्तर-बहू को जब पता चला कि रंगप्पा उसकी सास मंगम्मा के पीछे पड़ गया है तो उसके कान खड़े हो गए। कहीं सास के रुपये-पैसे रंगप्पा न ले, इस आशंका से वह बेचैन हो गई। तब उसने योजना बनाई और अपने बेटे से कहा कि जा दादी के पास, तुझे मिठाई देती है न? अगर मेरे पास आया तो पीयूँगी। बस, बच्चा मंगम्मा के पास आकर रहने लगा। मंगम्मा भी उसे चाहती ही थी। एक दिन पोता जिद कर बैठा कि मैं भी बेंगलूर चलूँगा। मंगम्मा क्या करे? माथे पर टोकरा, बगल में बच्चा! मुसीबत हो गई। तब बेटे और बहू ने आकर कहा कि उस दिन गलती हो गई। यूँ कैसे चलेगा? मंगम्मा अब खुशी-खुशी बेटे-बहू के साथ रहने लगी। धीरे-धीरे बहू ने शहर में दही बेचने का धंधा भी अपने हाथ में ले लिया। उसकी मंशा पूरी हो गई।
37. रंगप्पा कौन था और वह मंगम्मा से क्या चाहता था?
उत्तर-रंगप्पा मंगम्मा के गाँव का आदमी था— बड़ी शौकीन तबीयत का। कभी-कभार जूआ-उआ भी खेलता था। जब उसे पता चला कि मंगम्मा बेटे से अलग रहने लगी है तो मंगम्मा के पीछे पड़ गया। एक दिन उससे हाल-चाल पूछा और बोला कि मुझे रुपयों की जरूरत है। दे दो, लौटा दूँगा। मंगम्मा ने जब कहा कि पैसे कहाँ हैं तो बोला कि पैसे यहाँ-वहाँ गाड़कर रखने से क्या फायदा? दूसरे दिन रंगप्पा ने अमराई के पीछे रोक कर बाँह पकड़ ली और कहा-‘जरा बैठो मंगम्मा, जल्दी क्या है?’ दरअसल, रंगप्पा लालची और लम्पट दोनों ही था।
38. मंगम्पा का अपनी बहू के साथ किस बात को लेकर विवाद था?
[2012A, 2014AI, 2017AII, 2019A1,2022AII]
उत्तर-मंगम्मा का अपनी बहू के साथ विवाद उसके पोते के मुद्दे पर हुआ। मंगम्मा अपने पोते को बहुत प्यार करती थी। एक दिन उसकी बहू ने अपने बेटे को खूब पीटा। इस पर मंगम्मा बिगड़ गयी। वह बहू को फटकारने लगी। बहू भी गुस्से में आ गयी। दोनों में वाक्-युद्ध शुरू हो गया। उसकी बहू ने साफ शब्दों में कहा कि वह मेरा बेटा उसे मारने का मेरा हक है। उस घर में सास और बहू में स्वतंत्रता की होड़ लगी है। जिसमें बेटे ने भी पत्नी का ही साथ दिया। मंगम्मा का अपनी बहू के साथ विवाद का मुख्य कारण यही है।
39. लक्ष्मी कौन थी और उसका घर कहाँ था? ‘ढहते विश्वास’ शीर्षक कहानी के अनुसार लिखें। उत्तर-लक्ष्मी ‘ढहते विश्वास’ शीर्षक कहानी की मुख्य पात्र थी। उसका पति लक्ष्मण कलकत्ता में नौकरी करता था। लक्ष्मी का घर देवी नदी के बाँध के नीचे था।
40. मंगु को उसकी माँ अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं करवाना चाहती थी?
[2018AII; 2020BM,2020AI]
उत्तर- माँ की सारी ममता पगली मंगु पर ही निछावर थी। माँ समझती थी कि अस्पताल में कौन उसकी ठीक प्रकार से देखभाल करेगा? कौन उसे भोजन कराएगा? कौन उसे अपने साथ सुलाएगा? कौन उसके पेशाब से भींगे बिस्तर को बदलेगा? माँ से अलग क्या पगली लड़की रह सकेगी? क्या सचमुच में उसकी दवा दारू हो सकेगी? वह ठीक हो जाएगी। मैं उसकी शादी भी कर सकूँगी। पागलखाने में तो एक से एक पागल होते हैं? इनसे रक्षा कौन कर सकेगा? इन्हीं कारणों से माँ का विश्वास मंगु को अस्पताल भेजने पर नहीं था।
41. मंगु को उसकी माँ अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं करवाना चाहती थी?
[2018AII; 2020BM,2020AI]
उत्तर- माँ की सारी ममता पगली मंगु पर ही निछावर थी। माँ समझती थी कि अस्पताल में कौन उसकी ठीक प्रकार से देखभाल करेगा? कौन उसे भोजन कराएगा? कौन उसे अपने साथ सुलाएगा? कौन उसके पेशाब से भींगे बिस्तर को बदलेगा? माँ से अलग क्या पगली लड़की रह सकेगी? क्या सचमुच में उसकी दवा दारू हो सकेगी? वह ठीक हो जाएगी। मैं उसकी शादी भी कर सकूँगी। पागलखाने में तो एक से एक पागल होते हैं? इनसे रक्षा कौन कर सकेगा? इन्हीं कारणों से माँ का विश्वास मंगु को अस्पताल भेजने पर नहीं था
42. वल्लि अम्माल ने पाप्पाति के लिए क्या मन्नत मानी ? [2022AI] उत्तर- वल्लिं अम्माल ने पाप्पाति के लिए मन्नत मानी कि “पाप्पाति ठीक हो जाएगी तो वैदरीश्वरन जी के मंदिर जाकर दोनों हाथों में रेजगारी भरकर भगवान
43. सीता को किस दिन लगा कि ‘लापसी’ बिलकुल फीकी है? ‘लापसी’ खाते समय उसे कैसा महसूस हो रहा था? (2022AI]
उत्तर- सीता के बेटों ने तय किया कि होली के बाद माँ बारी-बारी से सभी के साथ रहेगी। ‘नाहरसिंहजी वाले दिन’ खाना खातये वक्त सीता को लगा कि ‘लापसी’ बिलकुल फीकी है। ‘लापसी’ खाते हुए उसे महसूस हो रहा था कि कौर गले में अटक रहा है।
44. सीता के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालें।
[2012A, 2013C]
उत्तर- सीता का व्यक्तित्व झुकने वाला नहीं। वह गैर इन्सानियत सहन नहीं कर पाती है। वह कभी इस पतोहू के साथ तो कभी उस पतोहू के साथ रहना भी उसे पसन्द नहीं था। उसे 50-50 रुपए देने का प्रस्ताव भी नापसन्द था। वह घर छोड़कर स्वतंत्र वायु में श्वास लेने के लिए निकल पड़ती है। सीता एक आदर्श
और सिद्धान्त प्रिय महिला थी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
45. लेखक किस विडम्बना की बात करते हैं?
उत्तर-लेखक भीमराव अंबेदकर (1891-1956) ने ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ शीर्षक निबंध में श्रम विभाजन के नाम जीवित रखी गयी जाति प्रथा की निंदा की है। उन्होंने लिखा है कि यह विडम्बना की ही बात है कि इस युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं है। समर्थन का एक आधार यह कहा जाता है कि आधुनिक सभ्य समाज ‘कार्य कुशलता’ के लिए श्रम विभाजन’ को आवश्यक मानता है और चूँकि जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है।इस तर्क के संबंध में पहली बात तो यही आपत्तिजनक है कि जाति प्रथा श्रम-विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन का भी रूप लिए हुए है। यह जाति प्रथा ऊँच-नीच का विभेद भी करती है। यह निंदनीय है।
46. सेन साहब, मदन, काशू और गिरधर का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर-आचार्य नलिन विलोचन शर्मा की कहानी है- ‘विष के दाँत’। शर्मा जी की यह अत्यंत सशक्त और प्रभावशाली कहानी है। “यह कहानी मध्यवर्ग के अनेक अंतर्विरोधों को उजागर करती है। कहानी का जैसा ठोस सामाजिक संदर्भ है, वैसा ही स्पष्ट मनोवैज्ञानिक आशय भी। आर्थिक कारणों से मध्यवर्ग के भीतर ही एक ओर सेन साहब जैसों की एक श्रेणी उभरती है जो अपनी महत्त्वाकांक्षा और सफेदपोशी के भीतर लिंग-भेद कुसंस्कार छिपाये हुए हैं तो दूसरी ओर गिरधर जैसे नौकरी पेशा निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति की श्रेणी है जो अनेक तरह की थोपी गयी बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाये रखने के लिए संघर्षरत है।
सेन साहब अमीर वर्ग के प्रतिनिधि हैं। वे कार रखते हैं। वे बेटे-बेटियों का पालन-पोषण रईसी के साथ करते हैं। गरीबों के प्रति उनकी संवेदनशीलता शून्य है। वे विष के दाँत रखने वाले काशू के पिता हैं।
मदन इस कहानी का नायक है। वह खोखा की पिटाई कर देता है। वहखोखा के विष के दाँत तोड़ डालता है। इसका उसे जुर्माना भी सहना पड़ता है। झोपड़ी खाली करनी पड़ती है। पिता की नौकरी छूट जाती है। फिर भी नायक मदन को, उसके पिता गिरधर को इसकी परवाह नहीं है।