18 March Class 9th Hindi Question Paper Annual Exam 2026
| Subject | Hindi |
| Exam Date | 18.3.2026 |
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बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 9वीं की वार्षिक परीक्षा 2026-27 (18 मार्च) से आयोजित की जाएगी जिसमें शामिल होना सभी छात्रों के लिए अनिवार्य है। ये परीक्षाएं 18 से 23 मार्च के बीच दो पालियों में (सुबह और दोपहर) आयोजित होती हैं। यह परीक्षा छात्रों को फाइनल बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार करने और उनके प्रदर्शन के आकलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बिहार बोर्ड कक्षा 9वीं वार्षिक परीक्षा 2026 मुख्य विवरण:
परीक्षा बोर्ड: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)।
कक्षा 9वीं वार्षिक परीक्षा/सैद्धांतिक परीक्षा।
परीक्षा का तिथि: 18.3.2026 से 23.3.2026
परीक्षा का तरीका: ऑफलाइन (पेन और पेपर मोड)।
विषय: Hindi English Science Social Science Math Sanskrit
परीक्षा शिफ्ट: आमतौर पर दो शिफ्ट (सुबह 9:30 – 12:30 और दोपहर 2:00 – 5:00) में होती है।
परीक्षा की तैयारी के टिप्स (Tips for Preparation):
NCERT पुस्तकों का अध्ययन: एनसीईआरटी और बिहार बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों को प्रतिदिन पढ़ें।
मॉडल प्रश्न पत्र: पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों और मॉडल पेपर का अभ्यास करें।
समय प्रबंधन: रिवीजन के लिए अंत में समय बचाएं।
रिजल्ट: परीक्षा के बादसंबंधित स्कूलों द्वारा रिजल्ट जारी किया जाता है।
9th वार्षिक परीक्षा Exam 2026-EXAM CENTER
इस परीक्षा का आयोजन आपके विद्यालय के स्तर पर होगा। अर्थात की जिस भी विद्यालय में आपका नामांकन है। उसी में जाकर आपको परीक्षा देना पड़ेगा ।
Admit Card 9th Annual Exam 2026
इस परीक्षा के लिए बिहार बोर्ड के तरफ से कोई भी ऑफिशियल एडमिट कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। क्योंकि यह आपके विद्यालय के स्तर पर आयोजित होने वाला एकमात्र वार्षिक परीक्षा है।
प्रश्न कहां से आएगा ?
कक्षा 9th के वार्षिक परीक्षा 2026 का प्रश्न पत्र आपके विद्यालय में 12 माह तक पढ़ाए गए पाठ से प्रश्न आएगा यानि सभी पाठ से प्रश्न पूछे जाएंगे
वार्षिक परीक्षा नहीं देंगे तो क्या होगा ?
बोर्ड ने साफ सुथरे शब्दों में सभी विद्यालय को निर्देश दिया हैं, यदि कोई छात्र/छात्रा परीक्षा में शामिल नहीं होंगे तो उनको किसी भी परिस्थिति में कक्षा 10वीं में नामांकन नहीं दी जाएगी।
क्या वार्षिक परीक्षा पास करना जरूरी हैं ?
हां, कक्षा 9वीं की वार्षिक परीक्षा पास करना अत्यंत जरूरी हैं। यदि आप इस परीक्षा में Fail हो गए तो आपको दुबारा से कक्ष 9वीं की विशेष परीक्षा देकर पास करने होंगे। तब हि 10वीं में नामांकन होगी।
क्या 9वीं का परीक्षा के कॉपी Check होता हैं?
जी हां, जब आपकी परीक्षा सम्पन्न हो जाती हैं, तब आपके कॉपी को आपके विद्यालय/कॉलेज के शिक्षकों के द्वारा चेक की जाती हैं। तथा इसका फाइनल रिजल्ट बोर्ड ऑफिस को भेजा भी जाता हैं।
वार्षिक परीक्षा का महत्व
यदि आप भी कक्षा 9वी की वार्षिक परीक्षा देने जा रहे हैं या देने वाले हैं तो आप सभी को इस परीक्षा में भाग लेना अति आवश्यक है वार्षिक परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की आगे की कक्षा में प्रवेश करने से पहले उसकी तैयारी को जांच किया जाए और तैयारी को बेहतर किया जाए ताकि वह आगे परीक्षा में किसी भी प्रकार में उनको दिक्कत ना हो और उनको जो भी कमजोरी है वह उसको सुधार सके इसलिए वार्षिक परीक्षा लिया जाता है वार्षिक परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाला छात्रों को आगे की परीक्षा परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद अस्त में विश्वास बढ़ता है
Objective Answer Key
| 1. | 11. | 21. | 31. | 41. |
| 2. | 12. | 22. | 32. | 42. |
| 3. | 13. | 23. | 33. | 43. |
| 4. | 14. | 24. | 34. | 44. |
| 5. | 15. | 25. | 35. | 45. |
| 6. | 16. | 26. | 36. | 46. |
| 7. | 17. | 27. | 37. | 47. |
| 8. | 18. | 28. | 38. | 48. |
| 9. | 19. | 29. | 39. | 49. |
| 10. | 20. | 30. | 40. | 50. |
| 51. | 61. | 71. | 81. | 91. |
| 52. | 62. | 72. | 82. | 92. |
| 53. | 63. | 73. | 83. | 93. |
| 54. | 64. | 74. | 84. | 94. |
| 55. | 65. | 75. | 85. | 95. |
| 56. | 66. | 76. | 86. | 96. |
| 57. | 67. | 77. | 87. | 97. |
| 58. | 68. | 78. | 88. | 98. |
| 59. | 69. | 79. | 89. | 99. |
| 60. | 70. | 80. | 90. | 100. |
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3. निबंध (विषयः अनुशासन)
अनुशासनः जीवन का आधार
‘अनुशासन’ दो शब्दों के मेल से बना है-अनु + शासन, जिसका अर्थ है किसी नियम के पीछे चलना या शासन के अनुसार चलना। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का बहुत महत्व है। बिना अनुशासन के न तो कोई व्यक्ति उन्नति कर सकता है और न ही कोई राष्ट्र।
विद्यार्थी जीवन में अनुशासन की उपयोगिता सबसे अधिक है। जो छात्र समय पर सोता है, समय पर जागता है और अपने सभी कार्य नियमबद्ध तरीके से करता है, वही भविष्य में एक सफल नागरिक बनता है। अनुशासन केवल कठोर नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि यह अपने मन और व्यवहार को नियंत्रित करने की एक कला है। प्रकृति भी हमें अनुशासन सिखाती है। सूर्य का समय पर निकलना, ऋतुओं का चक्र और ग्रहों की गति-सब कुछ एक निश्चित नियम में बँधा है। यदि समाज में अनुशासन न हो, तो चारों ओर अराजकता फैल जाएगी। अतः हमें अपने जीवन में अनुशासन को अपनाना चाहिए क्योंकि यह सफलता की पहली सीढ़ी है।
4. पत्र लेखन (पिताजी को पत्र)
परीक्षा भवन, पटना दिनांक: 06 मार्च, 2026
पूज्य पिताजी, सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ कुशल हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी सपरिवार प्रसन्न होंगे। मेरी पढ़ाई बहुत अच्छी चल रही है। मुझे अपनी अगली कक्षा के लिए कुछ नई पुस्तकें और व्याकरण की किताबें खरीदनी हैं। इसके लिए मुझे लगभग 1,000 रुपये की आवश्यकता है।
अतः आपसे प्रार्थना है कि कृपया शीघ्र ही यह राशि भेजने की कृपा करें ताकि मैं समय पर अपनी पढ़ाई शुरू कर सकूँ। माँ को मेरा प्रणाम और छोटों को प्यार।
आपका आज्ञाकारी पुत्र,
[आपका नाम]
5. किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर
(क) दारोगाजी की तरक्की रुकने की क्या वजह थी?
उत्तर: दारोगाजी के पास एक बहुत ही शानदार ‘तुर्की घोड़ी’ थी, जिससे वे बहुत प्रेम करते थे। उस घोड़ी के खर्च और उसकी वजह से आए आर्थिक संकट के कारण तथा रिश्वत न लेने की अपनी ईमानदारी के कारण उनकी तरक्की रुक गई थी।
ख) फाह्यान कौन थे? वे नालंदा कब आए थे?
उत्तर: फाह्यान एक प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु और यात्री थे। वे पाँचवीं शताब्दी (लगभग 400 ईस्वी) में नालंदा आए थे।
(घ) रैदास ने अपने ईश्वर को किन-किन नामों से पुकारा है?
उत्तर: संत रैदास ने अपने ईश्वर को राम, गोविंद, हरि, प्रभु, स्वामी और माधव जैसे नामों से पुकारा है।
(छ) लोकगीत किसे कहते हैं?
उत्तर: जो गीत जनसाधारण द्वारा रचे जाते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से गाए जाते हैं, उन्हें लोकगीत कहते हैं। ये गीत क्षेत्रीय संस्कृति और लोक जीवन की खुशियों-दुखों को दर्शाते हैं।
(झ) भारतीय नृत्य कला मंदिर कहाँ है? उसकी स्थापना किसने की थी?
उत्तर: भारतीय नृत्य कला मंदिर पटना (बिहार) में स्थित है। इसकी स्थापना सुप्रसिद्ध कलाकार पद्मश्री हरि उप्पल ने की थी।
6. आशय स्पष्ट करें (क)
“ग्राम-गीत हृदय की वाणी है, मस्तिष्क की ध्वनि नहीं”
आशयः इस पंक्ति का अर्थ है कि ग्राम-गीत (लोकगीत) ग्रामीण जनता की सहज भावनाओं और उनके हृदय के उद्गार होते हैं। इन्हें बनाने के लिए किसी कठिन व्याकरण या बौद्धिक कसरत (मस्तिष्क) की आवश्यकता नहीं होती। ये गीत सीधे दिल से निकलते हैं, जिनमें बनावट कम और संवेदना अधिक होती है। इनमें तर्क के बजाय प्रेम, विरह और करुणा जैसी मानवीय भावनाएँ प्रधान होती हैं।
