26 June Class 10th Hindi Question Paper Quarterly Exam 2026
बिहार बोर्ड (BSEB) द्वारा कक्षा 10वीं के लिए त्रैमासिक (Quarterly) परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य छात्रों का निरंतर मूल्यांकन करना और उन्हें बोर्ड परीक्षाओं (मैट्रिक) के लिए तैयार करना है।
परीक्षा का उद्देश्य:
विद्यार्थियों की विषय-वार समझ और प्रगति को ट्रैक करना। कक्षा 11वीं में दाखिले के लिए इन परीक्षाओं में शामिल होना अनिवार्य है।परीक्षा का स्तर: प्रश्न पत्र बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा ही तैयार किए जाते हैं, जो बोर्ड के पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित होते हैं।
परीक्षा का स्तर:
प्रश्न पत्र बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा ही तैयार किए जाते हैं, जो बोर्ड के पाठ्यक्रम (Syllabus) पर आधारित होते हैं।
कितने सिलेबस से प्रश्न रहेंगे Quarterly Exam 2026 Syllabus
कक्षा 10th के त्रैमासिक परीक्षा 2026 का प्रश्न पत्र आपके विद्यालय में जून माह तक पढ़ाए गए पाठ से प्रश्न आएगा
त्रैमासिक परीक्षा Exam 2026-EXAM CENTER
इस परीक्षा का आयोजन आपके विद्यालय के स्तर पर होगा। अर्थात की जिस भी विद्यालय में आपका नामांकन है। उसी में जाकर आपको परीक्षा देना पड़ेगा ।
Admit Card Quarterly Exam 2026
इस परीक्षा के लिए बिहार बोर्ड के तरफ से कोई भी ऑफिशियल एडमिट कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। इस परीक्षा का आयोजन आपके स्कूलों कॉलेज के अस्तर पर होगा
त्रैमासिक परीक्षा का महत्व
यदि आप भी कक्षा 10वीं की त्रैमासिक परीक्षा देने जा रहे हैं या देने वाले हैं तो आप सभी को इस परीक्षा में भाग लेना अति आवश्यक है त्रैमासिक परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की आगे की कक्षा में प्रवेश करने से पहले उसकी तैयारी को जांच किया जाए और तैयारी को बेहतर किया जाए ताकि वह आगे परीक्षा में किसी भी प्रकार में उनको दिक्कत ना हो और उनको जो भी कमजोरी है वह उसको सुधार सके इसलिए त्रैमासिक परीक्षा लिया जाता है
| Subject | Hindi |
| Exam Date | 26.6.2026 |
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Class 10th Hindi Subjective Question Answer
1. जातिप्रथा भारत के बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है?
[2017AII,2021A1,2022AII]
उत्तर – भीमराव अंबेदकर ने ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ में लिखा है कि जाति प्रथा पेशे का दोषपूर्ण पूर्व निर्धारित ही नहीं करती बल्कि मनुष्य को जीवनभर के लिए एक पेशों में बाँध भी देती है। भले ही पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त होने के कारण वह भूखों मर जाए। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपना पेशा बदलने की स्वतंत्रता न हो तो भूखे मरने के अलावा क्या रह जाता है। इस प्रकार पेशा परिवर्तन की अनुमति न देकर जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।
2.भारतीय समाज में जाति श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती?
[2023AII]
उत्तर- भीमराव अंबेदकर ने ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ शीर्षक निबंध में भारत में व्याप्त जाति प्रथा की निंदा की है। जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप नहीं कही जा सकती है। यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। यह प्रथा पेशे की स्वतंत्रता का गला घोंट देती है। यह एक दूषित प्रथा हो गयी है। स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व का यह प्रथा हनन करती है।
3.खोखा किन मामलों में अपवाद था ?
उत्तरः-सेन साहब का बेटा काशु (खोखा) घर में बनाए गए नियम के मामलों में अपवाद था। वह हमेशा अपने मन के अनुसार ही कार्य करता था पर लड़कियों को ऐसी आजादी नहीं थी।
4. विष के दाँत कहानी का नायक कौन है? तर्क पूर्ण उत्तर दें।
[2014A1,2017A1,2022AII]
उत्तर-आचार्य नलिन विलोचन शर्मा की कहानी ‘विष के दाँत’ का नायक मदन है। काशू इस कहानी का मुख्य पात्र है जो कहानी के आरंभ से अंत तक छाया रहता है। वह जीवन के नियमों का अपवाद था। उसे अपने पिता की अमीरी का घमंड था। मदन एक गरीब किन्तु निर्भीक और जीवट प्रवृत्ति का लड़का है। वह आत्म सम्मान प्रिय बालक है, इसी कारण वह ड्राइवर की बातों का प्रतिरोध करता है। मदन ही काशू के घमंड रूपी विष के दाँत को तोड़ता है
5.बहादुर अपने घर से क्यों भाग गया था
उत्तर:-एक बार बहादुर ने अपनी माँ की प्यारी भैंस को बहुत मारा। माँ ने भैंस की मार का काल्पनिक अनुमान करके एक डंडे से उसकी दुगुनी पिटाई की। लड़के का मन माँ से फट गया और वह चुपके से 2 रुपया लिया और घर से भाग गया।
6. बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज अपनी माँ को क्यों मानते थे?
[2018A1]
उत्तर-पिता जी के निधन के बाद बिरजू महाराज को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ा हाथ उनकी माँ का था। जब भी अम्मा नाच देखती थी तो बिरजू महाराज पूछते थे कि कही गलत तो नहीं कर रहा हूँ? बाबू जी वाला ढंग है या नहीं। कहीं गड़बड़ी तो नहीं हो रही। तब अम्मा बताती थी, तुम अपने बाबू जी की तस्वीर हो। इस प्रकार अम्मा इनका उत्साहवर्द्धन करते रहती थी। इसलिए बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज अपनी माँ को मानते थे
7. मछली और दीदी में क्या समानता दिखलाई पड़ी? स्पष्ट करें।
[2013A]
उत्तर-आदमी के चपेट में आने पर मछली कटने के लिए मजबूर थी। पानी नहीं रहने के कारण गमछे में लिपटी मछली लहरा रही थी। दीदी कमरे में करवट लिए पहनी हुई साड़ी को सिर से ओढ़े सिसक-सिसक कर रो रही थी। हिचकी लेते हुए दीदी का पूरा शरीर सिहर रहा था।
8. शिक्षा का ध्येय गाँधीजी क्या मानते थे और क्यों? [2012A, 2022AII]
उत्तर-शिक्षा का ध्येय गाँधीजी चरित्र-निर्माण को मानते हैं। यह साक्षरता से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, किताबी ज्ञान तो उस बड़े उद्देश्य का एक साधन मात्र है।
गाँधीजी का मानना है कि अगर हम व्यक्ति चरित्र निर्माण करने में सफल हो जाएँगे तो समाज अपना काम आप संभाल लेगा। इस प्रकार जिन व्यक्तियों का विकास हो जाएगा, उनके हाथों में समाज के संगठन का काम सौंपा जा सकता है।
9. गाँधीजी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं? ‘शिक्षा और संस्कृति’ पाठ के अनुसार लिखें।
(2024A1)
उत्तर- अहिंसक प्रतिरोध को गाँधीजी सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा कहते हैं। उनके अनुस यह शिक्षा बच्चों को मिलनेवाली साधारण अक्षर-ज्ञान की शिक्षा के बाद नहीं पहल होनी चाहिए।
10. कवि किसके बिना जगत् में जन्म व्यर्थ मानता है?
[2016A1,2022AI]
उत्तर-निर्गुण ब्रह्म उपासक गुरु नानक ‘राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा’ शीर्षक कविता में राम नाम की महिमा का बखान करते हुए कहते हैं कि ईश्वर की महिमा अपरमपार है। नाम-कीर्तन से बढ़कर कोई धर्म साधना नहीं है। इसलिए राम नाम के बिना जगत् में मनुष्य जन्म व्यर्थ है। राम नाम लेने से ही ईश्वर एवं ईश्वरत्व की प्राप्ति होती है।
